Saturday, 10 September 2016

पदयात्रा क्या होती है? क्यों निकाली जाती है?

दोस्तों आज मैं माँ अंबे के दरबार अम्बाजी के लिए धर्म की धजा लेकर हमारे पुरे काँरवे के साथ पद यात्रा पर निकल पड़ा हूँ। इस वर्ष ये मेरी २१ वीं पद यात्रा है और हमारे काँरवा (संघ) की २५ वीं पद यात्रा है।

दोस्तों कई बार मुजे मेरे मित्रो ने पूछा की ये पदयात्रा क्या होती है? क्यों निकाली जाती है? इसका क्या महत्व है? तो दोस्तों आज में इस विषय पर बात करूँगा।

दोस्तों मेरे मत से विशेष महत्व वाले स्थानों जैसे की मंदिरों में दर्शन हेतु, तीर्थों पर स्नान हेतु, सत्संग हेतु विशेष अवसरों पर पैदल जाना पदयात्रा कहलाती है।

दोस्तों हमारे सनातन धर्म में त्याग का विशेष महत्व बतलाया है। भोग विलास से कोई आध्यात्मिक प्राप्ति नही होती है। भोग तो इस भौतिक संसार में रोग ही पैदा करतें और पतन का कारण बनते हैं किन्तु उन्नति के मार्ग हेतु त्याग का मार्ग अपनाना पड़ता है। और पदयात्रा या पैदल यात्रा भी त्याग का ही एक रुप है।

दोस्तों मेरे अनुभव से पदयात्रा के मार्ग में पड़ने वाले स्थानों - ग्रामों में सत्संग, प्रवचन, औषधि वितरण, दीवार लेखन, जन जागरण, पीड़ितों की सेवा आदि अनैक परमार्थिक कार्य होते है जो कि वाहन- यात्रा से कठिन है। इसलिये शायद युगों युगों से पदयात्रायें निकाली जाती रही है।

दोस्तों हमारे समाज में सामूहिक मेलों-कुंभ पर्वों, मंदिरों के उत्सवों, विशेष सत्संगो, मनौति -कार्य पूरे होनें पर इत्यादि लाभ लेने हेतु स्थानीय परिस्थितियां और अवसर देखकर पदयात्रा निकाली जाती है।

और दोस्तों जिस जगह की पदयात्रा का उद्देश्य सात्विक हों, जनता का अहित नहीं हों, साधुजनों की सेवा का अवसर मिलें व उनकें अमृत वचन-आशीर्वाद मिलें उन सभी जगह पदयात्रायें शुभ है।

दोस्तों जो मनुष्य में त्याग की भावना हों, शरीर से स्वस्थ हों, परमार्थ का उद्देश्य मन में हों, पाप मुक्त होने की चाहत हों ऐसे मनुष्य अकेले या सामूहिक पदयात्रा में भाग ले सकते हैं।

सुप्रभात

जय अंबे
श्री राम
जय महादेव