दोस्तों शिक्षा हमारी जीवन साथी की तरह है जिसकी आवश्यकता हमे पग-पग पर पड़ती है। वह श्रेष्ठ गुरु की तरह हमारे जीवन को आलोकित कर उसे मार्गदर्शन प्रदान करती है।
इसलिये तो समाज को बेहरत बनाने के लिए और राष्ट्र को उन्नति की ओर ले जाने के लिए आज शिक्षा की विशेष आवश्यकता है।
इसलिये मैं कहूँगा शिक्षा का मकसद यह है की एक खाली दिमाग को खुले दिमाग में परिवर्तित करना और शिक्षा वो है जो स्कूल के दरवाजे खोलता है और जेल के दरवाजे बंद करता है।
क्योंकि शिक्षा ज़िन्दगी की तैयारी नहीं है; शिक्षा खुद ज़िन्दगी है। जैसे कोरे काग़ज़ पर ही पत्र लिखे जा सकते हैं, लिखे हुए पर नहीं, ठीक उसी प्रकार निर्मल अंत:करण पर ही योग की शिक्षा और साधना अंकित हो सकती है।
आदि मानव दूसरे जंगली जानवरों की तरह जंगलों में नंगे घूमते-फिरते थे। क्योंकि उनमें समाज शिक्षा नहीं थी इसलिए उस समय का आदमी जंगली कहलाता था।
इसलिये दोस्तों शिक्षा बाल्टी भरना नहीं है, ये तो आग जलाना है। क्योंकि बिना शिक्षा प्राप्त किये कोई भी व्यक्ति अपनी परम ऊँचाइयों को नहीं छू सकता।
सुप्रभात
जय अंबे
श्री राम
जय महादेव
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